Rahu Kaal what to do or not

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Rahu Kaal what to do or not

rahukal me na kare ye kam
Img Source: Google , Bhagya Manthan

राहु काल क्या करें क्या न करें ज्योतिषशास्त्र में राहु को नैसर्गिक पाप ग्रह माना गया है। पाप ग्रह होने के कारण यह अशुभ फल प्रदान करता है इसमें कोई संदेह नहीं है। शुभ कार्यो में विघ्न और बाधा डालना तो इनका अपना स्वभाव है। अत: शास्त्रानुसार राहु काल में किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करनी चाहिए।

सभी ग्रह नियत गति तथा समय से आकाशीय पिंड में भ्रमण करते हैं। ज्योतिषशास्त्रानुसार हर दिन का एक भाग राहु काल होता है। सप्ताह के सातों दिन इसका अलग अलग समय होता है।
Monday: 7:30 TO 9:00 AM
Tudesday: 3:00 TO 4:30 PM
Wednesday: 12:30 TO 1:30 PM
Thursday: 1:30 TO 3:00 PM
Friday: 10:30 to 12:00 AM
Saturday: 9:30 to 11:00 AM
Sunday: 4:00 to 6:00 PM

राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए | What should not do in Rahu Kaal / Time

  • राहु काल ( Rahu Kaal) में शुरु किया गया कोई भी शुभ कार्य बिना बाधा के पूरा नहीं होता है।
  • राहु काल ( Rahu Kaal) में कोई भी शुभ कार्य आरम्भ नहीं करना चाहिए।
  • इस काल में खरीदी-बिक्री करने से प्रायः हानि ही होती है।
  • इस अवधि में शुभ ग्रहों के लिए यज्ञ या उनसे सम्बन्धित कार्य करने में राहु बाधक होता है। इस कारण कार्य सम्पन्न नहीं हो पाता।
  • किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए राहुकाल ( Rahu Kaal) में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
  • यदि आप कही घूमने के लिए दूर (Long drive) जा रहे है तो राहु काल में यात्रा प्रारम्भ मत कीजिये।
  • राहु काल ( Rahu Kaal) में कभी भी या भूलकर भी वाहन, मकान, मोबाइल, कम्प्यूटर, टेलीविज़न,आभूषण या अन्य कोई भी बहुमूल्य वस्तु नहीं खरीदना चाहिए।
  • यदि इस काल में मोबाइल इत्यादि कोई इलेक्ट्रॉनिक वस्तु खरीदते है तो जल्दी ख़राब या चोरी हो जायेगा अथवा ख़राब या खोने का हमेशा भय बना रहेगा।
  • राहुकाल ( Rahu Kaal) में विवाह, सगाई, धार्मिक कार्य या गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए।
  • शेयर बाजार में भी निवेश करते समय राहु काल का अवश्य ध्यान रखना चाहिए अन्यथा नुक़सान हो सकता है।
  • इस काल में किसी नये व्यवसाय का शुभारंभ अथवा योजना नहीं बनानी चाहिए।

What should do in Rahu Kaal | राहु काल में क्या करना चाहिए

  • राहु नैसर्गिक अशुभ ग्रह है यह सर्वविदित है। राहु काल में यदि राहु से सम्बन्धित कार्य किये जाते हैं तो सकारात्मक परिणाम मिलता है।
  • राहु काल ( Rahu Kaal) में राहु ग्रह की शांति के लिए यज्ञ अनुष्ठान करना चाहिए।
  • यदि आपकी कुंडली में काल-सर्प दोष है और आप उसके लिए अनुष्ठान कराना चाहते है तो राहु काल का चयन कर सकते है अवश्य ही सकारात्मक परिणाम मिलेगा।
  • राहु ग्रह की शान्ति हेतु चींटी या पशु-पक्षी को यदि आप कुछ अनाज देते है तो राहु काल में खिलाने से तुरंत ही सकारात्मक परिणाम मिलना शुरू हो जाता है।
  • गोचर में राहु के प्रभाव में जो समय होता है उस समय राहु से सम्बन्धित कार्य किये जाये तो उनमें सकारात्मक परिणाम प्राप्त होता है।
  • बीमारी या अन्य परेशानी से छुटकारा पाने के लिए यदि आप राहु यंत्र धारण कर रहे है तो राहु काल में धारण करना श्रेष्ठकर होता है।

ज्योतिष में अन्य काल:

वैदिक ज्योतिष में राहु काल की तरह ही अन्य काल यथा होरा,चौघड़िया, मांदी या गुलिक काल भी है और सबका अपना अपना महत्त्व है। इसी प्रकार होरा भी राहुकाल से भिन्न है। होरा में ग्रहों की होरा होती है लेकिन राहु-केतु की कोई होरा नहीं होती है।

राहुकाल और चौघड़िया काल की गणना एक समान है। परन्तु मंगलवार के दिन शुभ चौघड़िया समय में ही राहु काल माना गया है। गुरुवार के दिन भी अमृत चौघड़िया में राहु काल भी है। मेरा अपना मानना यह है कि चौघड़िया के इस काल में कोई शुभ कार्य न करे तो अच्छा रहेगा।

अत: किसी भी शुभ कार्य को करते समय राहुकाल पर अवश्य ही विचार कर लेना चाहिए।

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